झज्जर में खारे पानी की जमीन पर पति-पत्नी ने उगाई खुशहाली

झज्जर में खारे पानी की जमीन पर पति-पत्नी ने उगाई खुशहाली

2 हेक्टेयर जमीन पर 40 लाख रुपए से शुरू किया झींगा पालन, 20 टन तक पहुंचा उत्पादन; सालाना 15.90 से 17 लाख रुपए की शुद्ध आय

दो टूक न्यूज

झज्जर। खारे पानी से प्रभावित जमीन पर पारंपरिक खेती करना मुश्किल था, लेकिन कुतानी गांव के किसान श्यामपाल चौहान और उनकी पत्नी मीना चौहान ने इसी चुनौती को कमाई के अवसर में बदल दिया। दोनों ने करीब 2 हेक्टेयर जमीन पर झींगा पालन शुरू किया। करीब 40 लाख रुपए के निवेश से शुरू किए गए इस काम में अब उत्पादन 20 टन तक पहुंच गया है। झींगा पालन से दंपती को सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपए की शुद्ध आय हो रही है।

खारे पानी वाली जमीन पर तलाशा कमाई का रास्ता

श्यामपाल चौहान की जमीन खारे पानी से प्रभावित होने के कारण पारंपरिक फसलों की खेती के लिए उपयुक्त नहीं थी। ऐसे में श्यामपाल और मीना ने जमीन को खाली छोड़ने के बजाय इसके वैकल्पिक उपयोग के बारे में सोचा। इसी दौरान उन्हें खारे पानी वाले क्षेत्र में झींगा पालन की संभावना के बारे में जानकारी मिली।

इसके बाद उन्होंने झज्जर के मत्स्य विभाग से संपर्क किया। विभाग की ओर से उन्हें झींगा पालन का प्रशिक्षण दिया गया। तालाब तैयार करने, झींगा बीज डालने, पानी की गुणवत्ता बनाए रखने और पालन के दौरान जरूरी सावधानियों के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई।

40 लाख रुपए निवेश कर तैयार किया तालाब

प्रशिक्षण और विभागीय मार्गदर्शन के बाद दंपती ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जमीन पर झींगा पालन के लिए तालाब तैयार कराया। करीब 40 लाख रुपए का निवेश कर भाटेरा क्षेत्र में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर झींगा पालन शुरू किया।

शुरुआत में पानी की गुणवत्ता और तालाब के प्रबंधन जैसी कई चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद श्यामपाल और मीना ने विभागीय सलाह के अनुसार पानी और झींगा पालन की लगातार निगरानी की।

एक साल में 18 से बढ़कर 20 टन हुआ उत्पादन

मेहनत और बेहतर प्रबंधन का असर उत्पादन पर भी दिखाई दिया। वर्ष 2024-25 में दंपती ने करीब 18 टन झींगा का उत्पादन किया। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर करीब 20 टन हो गया।

झींगा की बिक्री उन्हें करीब 380 से 480 रुपए प्रति किलो तक के भाव पर हुई। इससे उन्हें सालाना करीब 15.90 से 17 लाख रुपए की शुद्ध आय हो रही है।

पति-पत्नी ने मिलकर बदली जमीन की तस्वीर

श्यामपाल चौहान के अनुसार खारे पानी के कारण जिस जमीन पर पारंपरिक खेती मुश्किल थी, वही अब उनके परिवार की आय का मजबूत आधार बन चुकी है। झींगा पालन शुरू करने में मत्स्य विभाग से मिले प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन ने काफी मदद की।

श्यामपाल और मीना का कहना है कि शुरुआत में नया काम होने के कारण कई चुनौतियां आईं, लेकिन सही जानकारी और लगातार मेहनत से झींगा पालन को सफल बनाया जा सका। अब उनका अनुभव खारे पानी से प्रभावित क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी वैकल्पिक खेती और आय के नए रास्ते की मिसाल बन रहा है।

किसानों के लिए वैकल्पिक खेती का मॉडल

झींगा पालन के जरिए श्यामपाल और मीना ने ऐसी जमीन का उपयोग किया, जिस पर सामान्य खेती आसान नहीं थी। उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी और अच्छी आय के बाद यह प्रयोग उनके परिवार के लिए आर्थिक मजबूती का जरिया बन गया है।